चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का संपर्क चांद की सतह पर उतरने से थोड़ी देर पहले टूट गया है

चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का संपर्क चांद की सतह पर उतरने से थोड़ी देर पहले टूट गया है !
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष के सिवन ने मिशन के बाद कहा, "विक्रम लैंडर योजना के अनुरूप उतर रहा था और सतह से 2.1 किलोमीटर दूर तक सबकुछ सामान्य था. मगर इसके बाद उससे संपर्क टूट गया.
सब कुछ सुचारु तरीक़े से चल रहा था और वैज्ञानिक विक्रम के सतह के निकट पहुँचने के हर क़दम पर नज़र रखे हुए थे. विक्रम को रात 1:30 बजे से 2:30 बजे के बीच चांद की सतह पर उतरना था.जब बंगाल की खाड़ी में एक द्वीप से एक रॉकेट आज चंद्रयान-2 को लेकर अपनी यात्रा शुरू करेगा तो यह भारत के अंतरिक्ष में बढ़ती महत्वाकांक्षा को भी चांद के पार ले जाएगा.भारत का चाँद पर यह दूसरा मिशन है. भारत चाँद पर तब अपना मिशन भेज रहा है जब अपोलो 11 के चाँद मिशन की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है.

भारत का चंद्रयान-2 चाँद के अपरिचित दक्षिणी ध्रुव पर सितंबर के पहले हफ़्ते में लैंड करेगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि चाँद का यह इलाक़ा काफ़ी जटिल है. वैज्ञानिकों के अनुसार यहां पानी और जीवाश्म मिल सकते हैं.
मुंबई स्थित थिंक टैंक गेटवे हाउस में 'स्पेस एंड ओशन स्टडीज' प्रोग्राम के एक रिसर्चर चैतन्य गिरी ने वॉशिगंटन पोस्ट से कहा है, ''चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर कोई अंतरिक्षयान पहली बार उतरेगा. इस मिशन में लैंडर का नाम विक्रम दिया गया है और रोवर का नाम प्रज्ञान है. विक्रम भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम के पहले प्रमुख के नाम पर रखा गया है.
इस मिशन की ख़ास बात ये है कि ये चंद्रयान उस जगह पर जाएगा जहां अब तक कोई देश नहीं गया है. चंद्रयान चांद के दक्षिणी धुव्र पर उतरेगा.
इस इलाक़े से जुड़े जोखिमों के कारण कोई भी अंतरिक्ष एजेंसी वहां नहीं उतरी है. अधिकांश मिशन भूमध्यरेखीय क्षेत्र में गए हैं जहां दक्षिण धुव्र की तुलना में सपाट जमीन है.वहीं, दक्षिणी ध्रुव ज्वालमुखियों और उबड़-खाबड़ जमीन से भरा हुआ है और यहां उतरना जोखिम भरा है.



भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की उपलब्धि को देखने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी भी बेंगलुरु में इसरो के मुख्यालय पहुँचे थे

राशि का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी उनके आदर्श हैं और जब वो उनसे मिलेंगी तो उनके फिट रहने का राज़ 

और उनके टाइम मैनेजमेंट को लेकर जरूर सवाल करेंगी.
राशि का कहना है, "मैं उनसे जानना चाहूंगी कि वो कैसे फ़िट रहते हैं, कैसे वो इतना सारे काम को मैनेज करते हैं. मैं उनसे पूछूंगी कि एक समय में डिफ़ेंस, इंटर्नल अफ़ेयर्स, फ़ॉरेन अफ़ेयर्स, मनी आदि कैसे इतना जल्दी और आसानी से मैनेज करते हैं."

उनके पिता राजकुमार वर्मा किसान हैं और मां सीमा देवी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं. पढ़ाई के चलते वो कक्षा पांच से ही अपनी बुआ के पास जानकीपुरम में रहती हैं.
राशि वर्मा की तरह बिहार के गया से आठवीं की क्षात्रा सौम्या शर्मा भी स्पेस क्विज़ में चुनी गई हैं.
सौम्या के पिता राजनंदन बताते हैं, "करीब एक महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम 

में इसके बारे में बताया था. मुझे पता चला तो मैंने रिसर्च किया, इसरो की वेबसाइट से एक लिंक मिला जिसके 

ज़रिए अप्लाई करना था. मैंने ही सौम्या को इसके बारे में बताया और आवेदन करने को कहा."
इसरो ने कहा है कि चंद्रयान-2 सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा, जहां पहले कोई यान नहीं उतरा था. वैज्ञानिकों को चंद्रमा के इस हिस्से में पानी और जीवाश्म मिलने की उम्मीद है.
भारत ने 1960 के दशक में अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया था और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे में यह काफ़ी ऊपर है. भारत ने इससे पहले चंद्रयान-1 2008 में लॉन्च किया था. यह भी चाँद पर पानी की खोज में निकला था

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